श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 74
 
 
श्लोक  1.2.74 
श्राद्धपर्व ततो ज्ञेयं कुरूणामौर्ध्वदेहिकम्।
चार्वाकनिग्रह: पर्व रक्षसो ब्रह्मरूपिण:॥ ७४॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात श्राद्ध पर्व है, जिसमें मृत कौरवों के अन्त्येष्टि संस्कार का वर्णन है। तत्पश्चात ब्राह्मणवेशधारी राक्षस चार्वाक का निग्रह पर्व है ॥74॥
 
After that, there is Shraddha festival, in which the funeral rites of the dead Kauravas are described. After that, there is the festival of Nigraha of the Brahmin-disguised demon Charvak. 74॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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