श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 73
 
 
श्लोक  1.2.73 
ऐषीकं पर्व चोद्दिष्टमत ऊर्ध्वं सुदारुणम्।
जलप्रदानिकं पर्व स्त्रीविलापस्तत: परम्॥ ७३॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद अत्यंत दुःखद ऐषिकपर्व की कथा है। फिर जलप्रदनिक और स्त्रीविलासपर्व आते हैं। 73.
 
After this there is the story of the very tragic Aishikaparva. Then come the Jalapradnik and Strivilapaparva. 73.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)