श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 72
 
 
श्लोक  1.2.72 
सारस्वतं तत: पर्व तीर्थवंशानुकीर्तनम्।
अत ऊर्ध्वं सुबीभत्सं पर्व सौप्तिकमुच्यते॥ ७२॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद सारस्वत पर्व आता है, जिसमें तीर्थों और कुलों का वर्णन किया गया है। इसके बाद अत्यंत भीषण सौप्तिक पर्व आता है। 72.
 
After that comes Saraswat Parva, in which the pilgrimages and clans have been described. After this comes the extremely gruesome Sauptika Parva. 72.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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