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mahabharat 1.2.71: फिर कर्ण पर्व और उसके बाद शल्य पर्व है। इस पर्व में हृदयप्रवेश और गदायाधु पर्व भी हैं। 71.   |   mahabharat अध्याय 1.2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 71
 
 
श्लोक  1.2.71 
कर्णपर्व ततो ज्ञेयं शल्यपर्व तत: परम्।
ह्रदप्रवेशनं पर्व गदायुद्धमत: परम्॥ ७१॥
 
 
अनुवाद
फिर कर्ण पर्व और उसके बाद शल्य पर्व है। इस पर्व में हृदयप्रवेश और गदायाधु पर्व भी हैं। 71.
 
Then there is Karna Parva and after that Shalya Parva. In this festival there are also the Hridapravesh and Gadayadhu Parva. 71.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)