श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 68
 
 
श्लोक  1.2.68 
पर्वोक्तं भगवद्‍गीता पर्व भीष्मवधस्तत:।
द्रोणाभिषेचनं पर्व संशप्तकवधस्तत:॥ ६८॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद क्रमशः भगवद्गीता, भीष्मवध, द्रोणाभिषेक और संशप्तकवधपर्व हैं।॥ 68॥
 
After this, there are Bhagavadgita, Bhishmavadha, Dronabhishek and Sanshaptakavadhaparva respectively.॥ 68॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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