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mahabharat 1.2.65: तत्पश्चात् रथतीर्थसंख्यपर्व है और तत्पश्चात् क्रोधाग्नि को प्रज्वलित करनेवाला उलूकदूतागमनपर्व है ॥65॥   |   mahabharat अध्याय 1.2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 65
 
 
श्लोक  1.2.65 
रथातिरथसंख्या च पर्वोक्तं तदनन्तरम्।
उलूकदूतागमनं पर्वामर्षविवर्धनम्॥ ६५॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् रथतीर्थसंख्यपर्व है और तत्पश्चात् क्रोधाग्नि को प्रज्वलित करनेवाला उलूकदूतागमनपर्व है ॥65॥
 
After that, there is Ratathirath Sankhya Parva and after that there is Ulukdutaagaman Parva which ignites the fire of anger. 65॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)