श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 64
 
 
श्लोक  1.2.64 
ज्ञेयं विवादपर्वात्र कर्णस्यापि महात्मन:।
निर्याणं च तत: पर्व कुरुपाण्डवसेनयो:॥ ६४॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रसंग में महात्मा कर्ण का शास्त्रार्थ होता है। तत्पश्चात् कौरव और पाण्डव सेना का प्रस्थान पर्व होता है। 64॥
 
It is in this context that Mahatma Karna's debate is held. Thereafter, there is the departure festival of Kaurava and Pandava army. 64॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)