यानसन्धिस्तत: पर्व भगवद्यानमेव च।
मातलीयमुपाख्यानं चरितं गालवस्य च॥ ६१॥
सावित्रं वामदेव्यं च वैन्योपाख्यानमेव च।
जामदग्न्यमुपाख्यानं पर्व षोडशराजिकम्॥ ६२॥
अनुवाद
इसके बाद यानसन्धि और भगवद्यान पर्व है, जिसमें मातलिका उपाख्यान, गालव-चरित, सवित्र, वामदेव और वैन्य उपाख्यान, जामदग्न्य और षोडशाराजिक उपाख्यान आते हैं। 61-62॥
After this, there is Yanasandhi and Bhagvadyan Parva, in which Matalika anecdotes, Galav-Charita, Savitra, Vamdev and Vainya anecdotes, Jamdagnya and Shodasharajik anecdotes come. 61-62॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥