Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.2.61-62: इसके बाद यानसन्धि और भगवद्यान पर्व है, जिसमें मातलिका उपाख्यान, गालव-चरित, सवित्र, वामदेव और वैन्य उपाख्यान, जामदग्न्य और षोडशाराजिक उपाख्यान आते हैं। 61-62॥ | mahabharat अध्याय 1.2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यानसन्धिस्तत: पर्व भगवद्यानमेव च।
मातलीयमुपाख्यानं चरितं गालवस्य च॥ ६१॥
सावित्रं वामदेव्यं च वैन्योपाख्यानमेव च।
जामदग्न्यमुपाख्यानं पर्व षोडशराजिकम्॥ ६२॥
अनुवाद
इसके बाद यानसन्धि और भगवद्यान पर्व है, जिसमें मातलिका उपाख्यान, गालव-चरित, सवित्र, वामदेव और वैन्य उपाख्यान, जामदग्न्य और षोडशाराजिक उपाख्यान आते हैं। 61-62॥
After this, there is Yanasandhi and Bhagvadyan Parva, in which Matalika anecdotes, Galav-Charita, Savitra, Vamdev and Vainya anecdotes, Jamdagnya and Shodasharajik anecdotes come. 61-62॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥