श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 6-7
 
 
श्लोक  1.2.6-7 
अथर्चीकादयोऽभ्येत्य पितरो राममब्रुवन्।
राम राम महाभाग प्रीता: स्म तव भार्गव॥ ६॥
अनया पितृभक्त्या च विक्रमेण तव प्रभो।
वरं वृणीष्व भद्रं ते यमिच्छसि महाद्युते॥ ७॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् ऋचीक आदि पितरगण परशुराम के पास आए और बोले - 'महान् राम! भृगुवंश के रत्न, पराक्रमी परशुराम! हम आपकी पितृभक्ति और पराक्रम से अत्यंत प्रसन्न हैं। महाबली परशुराम! आपका कल्याण हो। हमसे जो भी वर चाहिए, माँग लीजिए।'
 
Thereafter, the ancestors like Richik etc. came to Parashurama and said - 'Great Ram! Powerful Parashurama, the jewel of Bhrigu dynasty!! We are very pleased with your devotion to your father and your valour. Great and mighty Parashurama! May you prosper. Ask for any boon you desire from us.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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