श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 59-60
 
 
श्लोक  1.2.59-60 
उद्योगपर्व विज्ञेयमत ऊर्ध्वं महाद्‍भुतम्।
तत: संजययानाख्यं पर्व ज्ञेयमत: परम्॥ ५९॥
प्रजागरं तथा पर्व धृतराष्ट्रस्य चिन्तया।
पर्व सानत्सुजातं वै गुह्यमध्यात्मदर्शनम्॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद इसे अत्यंत अद्भुत उद्योग पर्व समझना चाहिए। इसे संजययान पर्व कहते हैं। तत्पश्चात इसे प्रजागर पर्व समझना चाहिए, जिसका सम्बन्ध धृतराष्ट्र के चिन्ता के कारण रात्रि भर जागने से है। तत्पश्चात प्रसिद्ध सनत्सुजात पर्व है, जिसमें अत्यंत गोपनीय आध्यात्मिक तत्वज्ञान समाहित है। 59-60॥
 
After this, it should be considered as the most wonderful Udyog Parva. This is called Sanjayyan Parva. Thereafter, it should be considered as Prajagar Parva which is related to Dhritarashtra staying awake all night due to worry. After that, there is the famous Sanatsujata Parva, in which very confidential spiritual philosophy is included. 59-60॥
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