Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.2.57: इसके बाद क्रमशः कुण्डलहरण और अरण्य पर्व का पाठ किया जाता है। तत्पश्चात विराट पर्व आरम्भ होता है, जिसमें पाण्डवों के नगर में प्रवेश और कालपालन से सम्बन्धित पर्व हैं॥ 57॥ | mahabharat अध्याय 1.2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कुण्डलाहरणं पर्व तत: परमिहोच्यते।
आरणेयं तत: पर्व वैराटं तदनन्तरम्।
पाण्डवानां प्रवेशश्च समयस्य च पालनम्॥ ५७॥
अनुवाद
इसके बाद क्रमशः कुण्डलहरण और अरण्य पर्व का पाठ किया जाता है। तत्पश्चात विराट पर्व आरम्भ होता है, जिसमें पाण्डवों के नगर में प्रवेश और कालपालन से सम्बन्धित पर्व हैं॥ 57॥
After this, Kundalaharan and Araneya Parva are recited respectively. After that Virata Parva starts, in which there are parvas related to the entry of Pandavas into the city and time-keeping.॥ 57॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥