श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  1.2.56 
पतिव्रताया माहात्म्यं सावित्र्याश्चैवमद्‍भुतम्।
रामोपाख्यानमत्रैव पर्व ज्ञेयमत: परम्॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद सावित्री की पतिभक्ति का अद्भुत माहात्म्य है। तब तो यहीं पर रामोपाख्यान महोत्सव मनाया जाना चाहिए। 56॥
 
After this, there is amazing importance of Savitri's devotion to her husband. Then Ramopakhyan festival should be celebrated at this place only. 56॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)