श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  1.2.53 
निवातकवचैर्युद्धं पर्व चाजगरं तत:।
मार्कण्डेयसमास्या च पर्वानन्तरमुच्यते॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद क्रमशः निवातकवचयुद्ध, अजगर और मार्कण्डेय सामस्य पर्व कहा गया है। 53॥
 
After this, Nivatakavachayudh, Aajgar and Markandeya Samasya Parva have been said respectively. 53॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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