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mahabharat 1.2.53: इसके बाद क्रमशः निवातकवचयुद्ध, अजगर और मार्कण्डेय सामस्य पर्व कहा गया है। 53॥   |   mahabharat अध्याय 1.2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  1.2.53 
निवातकवचैर्युद्धं पर्व चाजगरं तत:।
मार्कण्डेयसमास्या च पर्वानन्तरमुच्यते॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद क्रमशः निवातकवचयुद्ध, अजगर और मार्कण्डेय सामस्य पर्व कहा गया है। 53॥
 
After this, Nivatakavachayudh, Aajgar and Markandeya Samasya Parva have been said respectively. 53॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)