श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  1.2.52 
तीर्थयात्रा तत: पर्व कुरुराजस्य धीमत:।
जटासुरवध: पर्व यक्षयुद्धमत: परम्॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद बुद्धिमान कुरुराज का तीर्थ पर्व, जटासुरवध पर्व और उसके बाद यक्षायुद्ध पर्व होता है। 52॥
 
Thereafter, there is the pilgrimage festival of intelligent Kururaj, Jatasurvadha festival and after that Yakshayuddha festival. 52॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)