श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  1.2.51 
इन्द्रलोकाभिगमनं पर्व ज्ञेयमत: परम्।
नलोपाख्यानमपि च धार्मिकं करुणोदयम्॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् इन्द्रलोकभिगमन पर्व है, तत्पश्चात् धर्ममय एवं करुणावर्धक नलोपाख्यान पर्व है ॥51॥
 
After that, there is the festival of Indralokabhigamana, then there is the religious and compassion-inducing Nalopakhyan festival. 51॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)