श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  1.2.49 
द्यूतपर्व तत: प्रोक्तमनुद्यूतमत: परम्।
तत आरण्यकं पर्व किर्मीरवध एव च॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद क्रमशः द्यूत और अनुद्युत पर्व हैं। तत्पश्चात वनयात्रा पर्व और किर्मीरवध पर्व हैं। 49।
 
After this there are Dyut and Anudyut parvas respectively. After that there are Vanayatra parva and Kirmeervadha parva. 49.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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