श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  1.2.47 
सभापर्व तत: प्रोक्तं मन्त्रपर्व तत: परम्।
जरासन्धवध: पर्व पर्व दिग्विजयं तथा॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद क्रमश: सभा पर्व, मंत्र पर्व, जरासंध-वध पर्व और दिग्विजय पर्व पर प्रवचन होता है। 4 7॥
 
After this, there is discourse on Sabha Parva, Mantra Parva, Jarasandha-Vadh Parva and Digvijay Parva respectively. 4 7॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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