श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  1.2.46 
सुभद्राहरणादूर्ध्वं ज्ञेया हरणहारिका।
तत: खाण्डवदाहाख्यं तत्रैव मयदर्शनम्॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
सुभद्रा के हरण के बाद हरण पर्व है, फिर खाण्डवदाह पर्व है, जिसमें मयदानव के मिलन की कथा है। 46.
 
After the abduction of Subhadra there is the Haranharana Parva, then there is the Khandavadaah Parva, in which there is the story of the meeting of Mayadanav. 46.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)