श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  1.2.45 
विदुरागमनं पर्व राज्यलम्भस्तथैव च।
अर्जुनस्य वने वास: सुभद्राहरणं तत:॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
विदुरगमन, राज्यलंभ पर्व, फिर अर्जुन-वनवास पर्व और फिर सुभद्राहरण पर्व। 45॥
 
Viduragamana, Rajyalambha Parva, then Arjuna-Vanvasa Parva and then Subhadraharan Parva. 45॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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