श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  1.2.44 
तत: स्वयंवरो देव्या: पाञ्चाल्या: पर्व चोच्यते।
क्षात्रधर्मेण निर्जित्य ततो वैवाहिकं स्मृतम्॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् पांचाल राजकुमारी देवी द्रौपदी के स्वयंवर उत्सव तथा क्षत्रिय धर्म द्वारा समस्त राजाओं पर विजय प्राप्त करने के पश्चात विवाह उत्सव का वर्णन है।
 
Thereafter is the description of the swayamvara festival of the Panchala princess Devi Draupadi and the wedding festival after achieving victory over all the kings through the Kshatriya Dharma.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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