श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  1.2.42 
पौष्यं पौलोममास्तीकमादिरंशावतारणम्।
तत: सम्भवपर्वोक्तमद्‍भुतं रोमहर्षणम्॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद पौष्य, पौलोम, आस्तिक और आदि अंशावतार नामक पर्व आते हैं। तत्पश्चात् संभव पर्व का वर्णन है, जो अत्यंत अद्भुत और रोमांचकारी है। 42॥
 
After this, there are the festivals of Paushya, Paulom, Aastik and Adi Anshavataran. After that, there is the description of Sambhav Parva, which is very amazing and thrilling. 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)