श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 40-41
 
 
श्लोक  1.2.40-41 
तस्य प्रज्ञाभिपन्नस्य विचित्रपदपर्वण:।
सूक्ष्मार्थन्याययुक्तस्य वेदार्थैर्भूषितस्य च॥ ४०॥
भारतस्येतिहासस्य श्रूयतां पर्वसंग्रह:।
पर्वानुक्रमणी पूर्वं द्वितीय: पर्वसंग्रह:॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
यह महाभारत ऐतिहासिक ज्ञान का भण्डार है। यह सूक्ष्मतम बातों और उन्हें अनुभव करने की विधियों से परिपूर्ण है। इसका प्रत्येक श्लोक और पर्व अद्भुत है और वेदों के धार्मिक अर्थों से सुशोभित है। अब इसके पर्वों की सूची सुनिए। प्रथम अध्याय में पर्व अनुक्रमणी और दूसरे में पर्व संग्रह है। 40-41।
 
This Mahabharata is a treasure trove of historical knowledge. It is full of minute things and the methods to experience them. Its every verse and festival is amazing and it is decorated with the religious meaning of the Vedas. Now listen to the list of its festivals. The first chapter has Parva Anukramani and the second has Parva Sangrah. 40-41.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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