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mahabharat 1.2.393: सायंकाल में महाभारत का पाठ करने से ब्राह्मण दिन में अपनी इन्द्रियों द्वारा किये गये पापों से मुक्त हो जाता है।   |   mahabharat अध्याय 1.2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 393
 
 
श्लोक  1.2.393 
यदह्ना कुरुते पापं ब्राह्मणस्त्विन्द्रियैश्चरन्।
महाभारतमाख्याय संध्यां मुच्यति पश्चिमाम्॥ ३९३॥
 
 
अनुवाद
सायंकाल में महाभारत का पाठ करने से ब्राह्मण दिन में अपनी इन्द्रियों द्वारा किये गये पापों से मुक्त हो जाता है।
 
By reciting the Mahabharata in the evening a Brahmin becomes free from the sins he commits through his senses during the day.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)