श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 389-390
 
 
श्लोक  1.2.389-390 
इदं कविवरै: सर्वैराख्यानमुपजीव्यते।
उदयप्रेप्सुभिर्भृत्यैरभिजात इवेश्वर:॥ ३८९॥
अस्य काव्यस्य कवयो न समर्था विशेषणे।
साधोरिव गृहस्थस्य शेषास्त्रय इवाश्रमा:॥ ३९०॥
 
 
अनुवाद
सभी महाकवि इस महाभारत कथा का आश्रय लेते हैं और लेंगे भी। जैसे उन्नति चाहने वाले सेवक महान गुरु का आश्रय लेते हैं। जैसे अन्य तीन आश्रम उत्तम गृहस्थ आश्रम से श्रेष्ठ नहीं हो सकते, वैसे ही संसार के कवि इस महाभारत काव्य से श्रेष्ठ काव्य रचने में समर्थ नहीं हो सकते ॥389-390॥
 
All the great poets take shelter of this Mahabharata story and will take shelter of it. Just like servants who want to progress take shelter of a great master. Just like the other three ashramas cannot be better than the excellent householder ashram, in the same way the poets of the world cannot be capable of creating poems better than this Mahabharata poem. ॥389-390॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)