अनाश्रित्यैतदाख्यानं कथा भुवि न विद्यते।
आहारमनपाश्रित्य शरीरस्येव धारणम्॥ ३८८॥
अनुवाद
जैसे भोजन के बिना शरीर जीवित नहीं रह सकता, वैसे ही इस पृथ्वी पर कोई भी कथा ऐसी नहीं है जो इस महाभारत का आश्रय लिए बिना प्रकाश में आई हो ॥388॥
Just as the body cannot survive without food, similarly there is no story on this earth that has come to light without taking recourse to this Mahabharata. ॥ 388॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥