श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 387
 
 
श्लोक  1.2.387 
क्रियागुणानां सर्वेषामिदमाख्यानमाश्रय:।
इन्द्रियाणां समस्तानां चित्रा इव मन:क्रिया:॥ ३८७॥
 
 
अनुवाद
जैसे विचित्र मानसिक क्रियाएँ समस्त इन्द्रियों की क्रियाओं का आधार हैं, वैसे ही यह आख्यान समस्त लौकिक-वैदिक क्रियाओं के उत्कृष्ट परिणामों का आधार है ॥387॥
 
Just as strange mental activities are the basis of the activities of all the senses, similarly this narration is the basis of the excellent results of all worldly-Vedic activities. ॥387॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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