खिलेषु हरिवंशश्च भविष्यं च प्रकीर्तितम्।
दशश्लोकसहस्राणि विंशच्छ्लोकशतानि च॥ ३७९॥
खिलेषु हरिवंशे च संख्यातानि महर्षिणा।
एतत् सर्वं समाख्यातं भारते पर्वसंग्रह:॥ ३८०॥
अनुवाद
खिलपर्वों में हरिवंश और भविष्य का वर्णन किया गया है। महर्षि व्यास ने हरिवंश के खिलपर्वों में बारह हज़ार (12,000) श्लोकों की गणना करके उन्हें रखा है। इस प्रकार इन सभी पर्वों का संग्रह महाभारत में वर्णित है। 379-380।
Harivansh and future have been described in the Khilparvas. Maharishi Vyas has calculated and kept twelve thousand (12,000) verses in the Khilparvas of Harivansh. In this way, a collection of all these parvas has been described in the Mahabharata. 379-380.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥