श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 377-378
 
 
श्लोक  1.2.377-378 
अध्याया: पञ्च संख्याता: पर्वण्यस्मिन् महात्मना।
श्लोकानां द्वे शते चैव प्रसंख्याते तपोधना:॥ ३७७॥
नव श्लोकास्तथैवान्ये संख्याता: परमर्षिणा।
अष्टादशैवमेतानि पर्वाण्युक्तान्यशेषत:॥ ३७८॥
 
 
अनुवाद
तपधानो! महर्षि महात्मा व्यासजी ने इस पर्व में पाँच (5) अध्याय और दो सौ नौ (209) श्लोक गिने हैं। इस प्रकार कुल मिलाकर ये अठारह पर्व कहे गए हैं। 377-378।
 
Tapadhano! The great sage Mahatma Vyasji has counted five (5) chapters and two hundred and nine (209) verses in this festival. Thus, in all, these are said to be eighteen festivals. 377-378.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)