श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  1.2.37 
अनाश्रित्येदमाख्यानं कथा भुवि न विद्यते।
आहारमनपाश्रित्य शरीरस्येव धारणम्॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
जैसे भोजन के बिना शरीर का जीवित रहना संभव नहीं है, वैसे ही इस इतिहास का आश्रय लिए बिना पृथ्वी पर कोई कथा नहीं है ॥37॥
 
Just as the survival of the body is not possible without food, similarly there is no story on earth without taking recourse to this history. ॥ 37॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas