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mahabharat 1.2.369: इसमें तत्त्वज्ञ व्यासजी ने तीन (3) अध्याय और एक सौ तेईस (123) श्लोक गिनाकर कहा है ॥369॥   |   mahabharat अध्याय 1.2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 369
 
 
श्लोक  1.2.369 
यत्राध्यायास्त्रय: प्रोक्ता: श्लोकानां च शतत्रयम्।
विंशतिश्च तथा श्लोका: संख्यातास्तत्त्वदर्शिना॥ ३६९॥
 
 
अनुवाद
इसमें तत्त्वज्ञ व्यासजी ने तीन (3) अध्याय और एक सौ तेईस (123) श्लोक गिनाकर कहा है ॥369॥
 
In this the philosopher Vyasji has enumerated three (3) chapters and one hundred and twenty-three (123) verses and said. 369॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)