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mahabharat 1.2.363-364: इस प्रकार यह सोलहवाँ मौसलपर्व कहलाता है। इसमें दार्शनिक व्यास ने आठ (8) अध्याय और तीन सौ बीस (320) श्लोकों की गणना की है। इसके बाद सत्रहवाँ महाप्रास्थानिकपर्व कहा गया है।   |   mahabharat अध्याय 1.2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 363-364
 
 
श्लोक  1.2.363-364 
इत्येतन्मौसलं पर्व षोडशं परिकीर्तितम्।
अध्यायाष्टौ समाख्याता: श्लोकानां च शतत्रयम्॥ ३६३॥
श्लोकानां विंशतिश्चैव संख्यातास्तत्त्वदर्शिना।
महाप्रस्थानिकं तस्मादूर्ध्वं सप्तदशं स्मृतम्॥ ३६४॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार यह सोलहवाँ मौसलपर्व कहलाता है। इसमें दार्शनिक व्यास ने आठ (8) अध्याय और तीन सौ बीस (320) श्लोकों की गणना की है। इसके बाद सत्रहवाँ महाप्रास्थानिकपर्व कहा गया है।
 
Thus this is called the sixteenth Mausalparva. In this, the philosopher Vyas has counted eight (8) chapters and three hundred twenty (320) verses. After this, the seventeenth Mahaprasthanikparva has been called. 363-364.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)