इत्येतन्मौसलं पर्व षोडशं परिकीर्तितम्।
अध्यायाष्टौ समाख्याता: श्लोकानां च शतत्रयम्॥ ३६३॥
श्लोकानां विंशतिश्चैव संख्यातास्तत्त्वदर्शिना।
महाप्रस्थानिकं तस्मादूर्ध्वं सप्तदशं स्मृतम्॥ ३६४॥
अनुवाद
इस प्रकार यह सोलहवाँ मौसलपर्व कहलाता है। इसमें दार्शनिक व्यास ने आठ (8) अध्याय और तीन सौ बीस (320) श्लोकों की गणना की है। इसके बाद सत्रहवाँ महाप्रास्थानिकपर्व कहा गया है।
Thus this is called the sixteenth Mausalparva. In this, the philosopher Vyas has counted eight (8) chapters and three hundred twenty (320) verses. After this, the seventeenth Mahaprasthanikparva has been called. 363-364.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥