Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.2.361-362: उस समय उसके सभी दिव्यास्त्र व्यर्थ होकर विस्मृत हो गए। अपनी आँखों के सामने वृष्णिवंशी स्त्रियों का हरण होते देखकर तथा अपना प्रभाव स्थिर न होते देखकर अर्जुन को बड़ा दुःख हुआ। तब व्यासजी के वचनों से प्रेरित होकर वे धर्मराज युधिष्ठिर से मिले और संन्यास में रुचि दिखाई। 361-362. | mahabharat अध्याय 1.2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उस समय उसके सभी दिव्यास्त्र व्यर्थ होकर विस्मृत हो गए। अपनी आँखों के सामने वृष्णिवंशी स्त्रियों का हरण होते देखकर तथा अपना प्रभाव स्थिर न होते देखकर अर्जुन को बड़ा दुःख हुआ। तब व्यासजी के वचनों से प्रेरित होकर वे धर्मराज युधिष्ठिर से मिले और संन्यास में रुचि दिखाई। 361-362.
All his divine weapons became useless and forgotten at that time. Arjuna was very saddened to see the women of Vrishni clan being kidnapped in front of his eyes and his influence not being stable. Then, inspired by the words of Vyasji, he met Dharmaraja Yudhishthir and showed interest in renunciation. 361-362.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥