श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  1.2.36 
आत्मेव वेदितव्येषु प्रियेष्विव हि जीवितम्।
इतिहास: प्रधानार्थ: श्रेष्ठ: सर्वागमेष्वयम्॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
जैसे जानने योग्य पदार्थों में आत्मा और प्रेम करने योग्य पदार्थों में अपना जीवन श्रेष्ठ है, वैसे ही परब्रह्म परमात्मा की प्राप्ति का उद्देश्य पूर्ण करने वाला यह इतिहास समस्त शास्त्रों में श्रेष्ठ है ॥36॥
 
Just as the soul is the best among the things worth knowing and one's own life among the things worth loving, in the same way, this history which fulfills the purpose of attaining the Supreme God is the best among all the scriptures. 36॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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