श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 354
 
 
श्लोक  1.2.354 
यत्र ते पुरुषव्याघ्रा: शस्त्रस्पर्शहता युधि।
ब्रह्मदण्डविनिष्पिष्टा: समीपे लवणाम्भस:॥ ३५४॥
 
 
अनुवाद
यहाँ उल्लेख है कि यदुवंश के वे महारथी क्षारसमुद्र के तट पर परस्पर युद्ध करते हुए शस्त्रों के स्पर्श मात्र से ही मारे गए थे। ब्राह्मणों का श्राप उन्हें पहले ही कुचल चुका था।
 
It is mentioned here that those great warriors of the Yadu dynasty were killed on the banks of the Ksharasamudra in a battle with each other by the mere touch of weapons. The curse of the Brahmins had already crushed them.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas