श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 351
 
 
श्लोक  1.2.351 
नारदाच्चैव शुश्राव वृष्णीनां कदनं महत् ।
एतदाश्रमवासाख्यं पर्वोक्तं महदद्‍भुतम्॥ ३५१॥
 
 
अनुवाद
नारद जी से ही उन्होंने यदुवंशियों के महासंहार का समाचार सुना था। इसे अत्यंत अद्भुत आश्रमवासिकपर्व कहा जाता है। 351.
 
It was from Narada that he heard the news of the great massacre of the Yaduvanshis. This is called the most wonderful Ashramavasikaparva. 351.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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