श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 339
 
 
श्लोक  1.2.339 
तत् संवर्तमरुत्तीयं यत्राख्यानमनुत्तमम्।
सुवर्णकोषसम्प्राप्तिर्जन्म चोक्तं परीक्षित:॥ ३३९॥
 
 
अनुवाद
जिसमें परम श्रेष्ठ योगी संवर्त और राजा मरुत्त का उपाख्यान है। युधिष्ठिर को स्वर्ण कोष की प्राप्ति और परीक्षित के जन्म का वर्णन है ॥339॥
 
In which there is the anecdote of the most excellent yogi Samvarta and King Marutta. There is a description of Yudhishthira's acquisition of the golden treasure and the birth of Parikshit. 339॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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