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mahabharat 1.2.338: और कुल आठ हजार (8,000) श्लोकों का पाठ किया गया है। उसके बाद अश्वमेधिक नामक चौदहवें पर्व की कथा है। 338।   |   mahabharat अध्याय 1.2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  1.2.338 
श्लोकानां तु सहस्राणि प्रोक्तान्यष्टौ प्रसंख्यया।
ततोऽश्वमेधिकं नाम पर्व प्रोक्तं चतुर्दशम्॥ ३३८॥
 
 
अनुवाद
और कुल आठ हजार (8,000) श्लोकों का पाठ किया गया है। उसके बाद अश्वमेधिक नामक चौदहवें पर्व की कथा है। 338।
 
And a total of eight thousand (8,000) verses have been recited. After that there is the story of the fourteenth festival called Ashwamedhika. 338.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)