श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 337
 
 
श्लोक  1.2.337 
एतत् त्रयोदशं पर्व धर्मनिश्चयकारकम्।
अध्यायानां शतं त्वत्र षट्चत्वारिंशदेव तु॥ ३३७॥
 
 
अनुवाद
धर्म का निर्णय करने वाला यह पर्व तेरहवाँ है, इसमें एक सौ छियालीस (146) अध्याय हैं।
 
This festival which decides about Dharma is the thirteenth one. It has one hundred and forty six (146) chapters. 337.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)