Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.2.334-336: दान के विशेष उद्देश्य, दान की उत्तम विधि, आचरण और उसके नियम, सत्यभाषण की पराकाष्ठा, गौ और ब्राह्मण का माहात्म्य, धर्मों का रहस्य तथा स्थान और काल (तीर्थ और पर्व) की महिमा - ये सब अनेक कथाएँ इस उत्तम अनुशासन पर्व में वर्णित हैं। इसी में भीष्म को स्वर्ग प्राप्त हुआ बताया गया है ॥334-336॥ | mahabharat अध्याय 1.2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दान के विशेष उद्देश्य, दान की उत्तम विधि, आचरण और उसके नियम, सत्यभाषण की पराकाष्ठा, गौ और ब्राह्मण का माहात्म्य, धर्मों का रहस्य तथा स्थान और काल (तीर्थ और पर्व) की महिमा - ये सब अनेक कथाएँ इस उत्तम अनुशासन पर्व में वर्णित हैं। इसी में भीष्म को स्वर्ग प्राप्त हुआ बताया गया है ॥334-336॥
The special objects of charity, the best method of charity, the conduct and its rules, the height of speaking truth, the greatness of cows and Brahmins, the secrets of religions and the glory of places and times (pilgrimages and festivals) - all these many stories are described in this excellent Anushasana Parva. In this only, Bhishma is said to have attained heaven. ॥ 334-336॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥