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mahabharat 1.2.332: जिसमें कहा गया है कि गंगापुत्र भीष्म से धर्म का निश्चित तत्त्व सुनकर कुरुराज युधिष्ठिर शान्त हो गए ॥332॥   |   mahabharat अध्याय 1.2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 332
 
 
श्लोक  1.2.332 
यत्र प्रकृतिमापन्न: श्रुत्वा धर्मविनिश्चयम्।
भीष्माद् भागीरथीपुत्रात् कुरुराजो युधिष्ठिर:॥ ३३२॥
 
 
अनुवाद
जिसमें कहा गया है कि गंगापुत्र भीष्म से धर्म का निश्चित तत्त्व सुनकर कुरुराज युधिष्ठिर शान्त हो गए ॥332॥
 
In which it is said that Kuru King Yudhishthira became calm after listening to the definite principle of Dharma from Ganga's son Bhishma. ॥ 332॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)