Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.2.329-331: इस प्रकार यह बारहवाँ पर्व कहा गया है, जो विद्वानों को अत्यंत प्रिय है। इस पर्व में तीन सौ उनचास (339) अध्याय हैं और हे तपस्वियों! इसके श्लोकों की संख्या चौदह हजार सात सौ बत्तीस (14,732) है। इसके बाद उत्तम अनुशासन पर्व है, इसे जानना चाहिए। 329-331। | mahabharat अध्याय 1.2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
द्वादशं पर्व निर्दिष्टमेतत् प्राज्ञजनप्रियम्।
अत्र पर्वणि विज्ञेयमध्यायानां शतत्रयम्॥ ३२९॥
त्रिंशच्चैव तथाध्याया नव चैव तपोधना:।
चतुर्दश सहस्राणि तथा सप्त शतानि च॥ ३३०॥
सप्त श्लोकास्तथैवात्र पञ्चविंशतिसंख्यया।
अत ऊर्ध्वं च विज्ञेयमनुशासनमुत्तमम्॥ ३३१॥
अनुवाद
इस प्रकार यह बारहवाँ पर्व कहा गया है, जो विद्वानों को अत्यंत प्रिय है। इस पर्व में तीन सौ उनचास (339) अध्याय हैं और हे तपस्वियों! इसके श्लोकों की संख्या चौदह हजार सात सौ बत्तीस (14,732) है। इसके बाद उत्तम अनुशासन पर्व है, इसे जानना चाहिए। 329-331।
Thus, this is said to be the twelfth festival, which is very dear to the learned people. This festival has three hundred and forty-nine (339) chapters and O ascetics! Its verses number fourteen thousand seven hundred and thirty-two (14,732). After this, there is the Uttam Anushasana Parva, this should be known. 329-331.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥