श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 317
 
 
श्लोक  1.2.317 
विलापो वीरपत्नीनां यत्रातिकरुण: स्मृत:।
क्रोधावेश: प्रमोहश्च गान्धारीधृतराष्ट्रयो:॥ ३१७॥
 
 
अनुवाद
वीर पत्नियों का अत्यन्त करुण विलाप वर्णित है। गांधारी और धृतराष्ट्र के क्रोधित होकर मूर्छित हो जाने का उल्लेख है ॥317॥
 
There is a statement of very compassionate lamentation of the brave wives. There is mention of Gandhari and Dhritarashtra becoming angry and unconscious. 317॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)