श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 316
 
 
श्लोक  1.2.316 
धृतराष्ट्रस्य चात्रैव कौरवायोधनं तथा।
सान्त:पुरस्य गमनं शोकार्तस्य प्रकीर्तितम्॥ ३१६॥
 
 
अनुवाद
इसी पर्व में शोकग्रस्त धृतराष्ट्र के अपने हरम की स्त्रियों के साथ कौरवों के युद्धक्षेत्र में जाने की कथा वर्णित है।
 
In this very festival, the story of the grief-stricken Dhritarashtra going to the battlefield of the Kauravas along with the women of his harem is described.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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