श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 308
 
 
श्लोक  1.2.308 
द्रौणेश्च द्रोहबुद्धित्वं वीक्ष्य पापात्मनस्तदा।
द्रौणिद्वैपायनादीनां शापाश्चान्योन्यकारिता:॥ ३०८॥
 
 
अनुवाद
उस समय पापी द्रोणपुत्र के द्वेषपूर्ण विचारों को देखकर द्वैपायन व्यास और श्रीकृष्ण ने अश्वत्थामा को और अश्वत्थामा ने उसे शाप दिया। इस प्रकार दोनों पक्षों ने एक दूसरे को शाप दिया ॥308॥
 
At that time, seeing the malevolent thoughts of sinful Drona's son, Dwaipayana Vyas and Shri Krishna cursed Ashwatthama and Ashwatthama cursed him. In this way both sides cursed each other. 308॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)