श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 307
 
 
श्लोक  1.2.307 
मैवमित्यब्रवीत् कृष्ण: शमयंस्तस्य तद् वच:।
यत्रास्त्रमस्त्रेण च तच्छमयामास फाल्गुन:॥ ३०७॥
 
 
अनुवाद
परंतु भगवान् श्रीकृष्ण ने अश्वत्थामा के क्रोधपूर्ण वचनों को - ‘मैवम्’ - ‘पाण्डवों का विनाश न हो’ कहकर शांत कर दिया। उसी समय अर्जुन ने अपने दिव्यास्त्र से उसके अस्त्र को शांत कर दिया ॥307॥
 
But Lord Shri Krishna pacified Ashwatthama's angry words by saying - 'Maivam' - 'May the Pandavas not be destroyed.' At the same time, Arjun silenced his weapon with his divine weapon. 307॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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