श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 306
 
 
श्लोक  1.2.306 
भीमसेनभयाद् यत्र दैवेनाभिप्रचोदित:।
अपाण्डवायेति रुषा द्रौणिरस्त्रमवासृजत्॥ ३०६॥
 
 
अनुवाद
तदनन्तर भीमसेन के भय से भयभीत होकर अश्वत्थामा ने दैवी प्रेरणा से पाण्डवों का विनाश करने के लिए क्रोधपूर्वक दिव्यास्त्र का प्रयोग किया ॥306॥
 
Then, fearing the fear of Bhimsen, Ashwatthama, with divine inspiration, furiously used the divine weapon to destroy the Pandavas. 306॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)