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mahabharat 1.2.299: अश्वत्थामा ने जो भी अस्त्र-शस्त्र चलाए, उस राक्षस ने उन सबको नष्ट कर दिया। यह देखकर द्रोणपुत्र ने तुरन्त भयंकर नेत्रों वाले भगवान रुद्र की स्तुति करके उन्हें प्रसन्न किया॥299॥   |   mahabharat अध्याय 1.2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 299
 
 
श्लोक  1.2.299 
तेन व्याघातमस्त्राणां क्रियमाणमवेक्ष्य च।
द्रौणिर्यत्र विरूपाक्षं रुद्रमाराध्य सत्वर:॥ २९९॥
 
 
अनुवाद
अश्वत्थामा ने जो भी अस्त्र-शस्त्र चलाए, उस राक्षस ने उन सबको नष्ट कर दिया। यह देखकर द्रोणपुत्र ने तुरन्त भयंकर नेत्रों वाले भगवान रुद्र की स्तुति करके उन्हें प्रसन्न किया॥299॥
 
Whatever weapons Ashvatthama used, that demon destroyed them all. Seeing this, Drona's son immediately prayed to the fierce-eyed Lord Rudra and pleased him.॥ 299॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)