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mahabharat 1.2.276: इसी पर्व में यह भी उल्लेख है कि पूर्व में की गई प्रतिज्ञा के अनुसार भीमसेन ने दु:शासन की छाती में छुरा घोंपकर उसका रक्त पी लिया था।   |   mahabharat अध्याय 1.2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 276
 
 
श्लोक  1.2.276 
प्रतिज्ञापूर्वकं चापि वक्षो दु:शासनस्य च।
भित्त्वा वृकोदरो रक्तं पीतवान् यत्र संयुगे॥ २७६॥
 
 
अनुवाद
इसी पर्व में यह भी उल्लेख है कि पूर्व में की गई प्रतिज्ञा के अनुसार भीमसेन ने दु:शासन की छाती में छुरा घोंपकर उसका रक्त पी लिया था।
 
In this very festival it is also mentioned that in accordance with the promise made earlier, Bhimasena pierced the chest of Dushasan and drank his blood.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)