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mahabharat 1.2.275: तत्पश्चात् युधिष्ठिर और अर्जुन एक दूसरे के प्रति क्रोधपूर्ण भाव रखते हैं, जहाँ भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को समझाकर शांत करते हैं ॥275॥   |   mahabharat अध्याय 1.2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 275
 
 
श्लोक  1.2.275 
अन्योन्यं प्रति च क्रोधो युधिष्ठिरकिरीटिनो:।
यत्रैवानुनय: प्रोक्तो माधवेनार्जुनस्य हि॥ २७५॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् युधिष्ठिर और अर्जुन एक दूसरे के प्रति क्रोधपूर्ण भाव रखते हैं, जहाँ भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को समझाकर शांत करते हैं ॥275॥
 
After that, Yudhishthir and Arjuna have angry expressions towards each other, where Lord Krishna calms Arjun down by convincing him. 275॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)