श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 2: समन्तपंचकक्षेत्रका वर्णन, अक्षौहिणी सेनाका प्रमाण, महाभारतमें वर्णित पर्वों और उनके संक्षिप्त विषयोंका संग्रह तथा महाभारतके श्रवण एवं पठनका फल  »  श्लोक 274
 
 
श्लोक  1.2.274 
द्वैरथे यत्र कर्णेन धर्मराजो युधिष्ठिर:।
संशयं गमितो युद्धे मिषतां सर्वधन्विनाम्॥ २७४॥
 
 
अनुवाद
इसी पर्व में कर्ण के साथ युधिष्ठिर के द्वैरथ (द्वन्द्व) युद्ध का वर्णन है, जिसमें कर्ण ने समस्त वीर धनुर्धरों के सामने धर्मराज युधिष्ठिर के प्राण संकट में डाल दिए थे॥274॥
 
In this very festival, the description of Yudhishthira's Dwairath (duel) battle with Karna is mentioned, in which Karna endangered the life of Dharmaraja Yudhishthira in front of all the brave archers.॥ 274॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)